भारत का संविधान | अनुच्छेद 1 से 448 तक (पूरी जानकारी आसान भाषा में)
https://satyadarshanblog.blogspot.com/2025/11/dr-bhimrao-ambedkar-biography-in-hindi.html
भारत का संविधान (अनुच्छेद 1 से 50)
अनुच्छेद 1 — भारत का स्वरूप
भारत एक संघीय गणराज्य (Union of States) है।
अनुच्छेद 2 — नए राज्यों का गठन
केंद्र सरकार संसद के निर्णय से नए राज्य बना सकती है या सीमाएँ बदल सकती है।
अनुच्छेद 3 — राज्यों और केंद्र के बीच सीमाओं का परिवर्तन
केंद्र सरकार राज्य की सीमाएँ बदल सकती है, नए राज्य बना सकती है और राज्यों को विलय कर सकती है।
अनुच्छेद 4 — कानून का प्रभाव
राज्यों में सीमाओं, राज्यों के गठन और संशोधन के संबंध में संसद द्वारा बनाए गए कानून संविधान के अनुसार लागू होंगे।
अनुच्छेद 5 — नागरिकता की शुरुआत
संविधान लागू होने के समय भारत के नागरिक कौन होंगे, इसका निर्णय किया गया।
अनुच्छेद 6 — नागरिकता का अधिकार
कुछ विशेष लोगों को नागरिकता देने के लिए संविधान में नियम बनाए गए।
अनुच्छेद 7 — भारत लौटने वाले प्रवासियों की नागरिकता
विदेश में रहने वाले प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियम निर्धारित हैं।
अनुच्छेद 8 — विदेशी नागरिकों की नागरिकता
कानून के अनुसार कुछ लोगों को भारत की नागरिकता मिल सकती है।
अनुच्छेद 9 — नागरिकता की समाप्ति
कानून के अनुसार किसी व्यक्ति की नागरिकता समाप्त हो सकती है।
अनुच्छेद 10 — सभी नागरिकों की समानता
कानून के अनुसार सभी नागरिकों के अधिकार समान होंगे।
अनुच्छेद 11 — नागरिकता का विस्तार
कानून द्वारा नागरिकता देने या लेने के नियम संसद तय करेगी।
अनुच्छेद 12 — राज्य की परिभाषा
राज्य का मतलब केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और उनके अधीन सरकारी संस्थाएं हैं।
अनुच्छेद 13 — कानून और मौलिक अधिकार
कोई भी कानून जो मौलिक अधिकारों के खिलाफ हो, वह असंवैधानिक माना जाएगा।
अनुच्छेद 14 — समानता का अधिकार
सभी व्यक्ति कानून के सामने समान हैं और कानून द्वारा समान सुरक्षा प्राप्त करेंगे।
अनुच्छेद 15 — भेदभाव का निषेध
केंद्र या राज्य किसी नागरिक के धर्म, लिंग, जाति, जन्म या क्षेत्र के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकते।
अनुच्छेद 16 — रोजगार में समान अवसर
केंद्र और राज्य सरकारें रोजगार में सभी को समान अवसर देंगी।
अनुच्छेद 17 — अस्पृश्यता का उन्मूलन
अस्पृश्यता पूरी तरह से निषिद्ध है। इसे कानून के द्वारा दंडनीय बनाया गया है।
अनुच्छेद 18 — उपाधियों का निषेध
भारत में कोई भी व्यक्ति किसी विदेशी उपाधि का प्रयोग नहीं कर सकता।
अनुच्छेद 19 — अभिव्यक्ति और स्वतंत्रता
सभी नागरिकों को **स्वतंत्रता, बोलने, लिखने, इकट्ठा होने, संघ बनाने और आंदोलन करने** का अधिकार है।
अनुच्छेद 20 — दंड और न्याय
कोई भी व्यक्ति पिछली क्रियाओं के लिए दंडनीय नहीं होगा, और अन्य कानूनी सुरक्षा प्राप्त करेगा।
अनुच्छेद 21 — जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता
किसी भी व्यक्ति को जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से **बिना कानून के** वंचित नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 22 — गिरफ्तारी और हिरासत
केंद्र और राज्य सरकारें हिरासत और गिरफ्तारी के नियम संविधान के अनुसार बनाएंगी।
अनुच्छेद 23 — जबरदस्ती श्रम निषेध
किसी व्यक्ति को जबरदस्ती काम करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 24 — बाल श्रम निषेध
किसी भी बच्चे को **14 वर्ष से कम उम्र में खतरनाक कार्य करने के लिए नहीं रखा जा सकता।
अनुच्छेद 25 — धर्म की स्वतंत्रता
हर व्यक्ति को धर्म मानने, पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता है।
अनुच्छेद 26 — धार्मिक संस्थाओं का प्रबंधन
धार्मिक समुदाय अपने धार्मिक कार्य और संस्थाओं का प्रबंधन कर सकते हैं।
अनुच्छेद 27 — करों से मुक्ति
किसी व्यक्ति से धर्म के प्रचार के लिए कर नहीं लिया जाएगा।
अनुच्छेद 28 — धार्मिक शिक्षा का नियंत्रण
सरकारी स्कूलों में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी। धार्मिक संस्थानों द्वारा चलाए स्कूलों में दी जा सकती है।
अनुच्छेद 29 — सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार
संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदायों को संरक्षण दिया जाएगा।
अनुच्छेद 30 — अल्पसंख्यक संस्थाओं के अधिकार
अल्पसंख्यक समुदाय अपने स्कूल और संस्थान स्थापित और संचालित कर सकते हैं।
अनुच्छेद 31 — संपत्ति का अधिकार (पूर्व)
संविधान के अनुसार संपत्ति का अधिकार नागरिकों को दिया गया था, बाद में इसे संशोधन किया गया।
अनुच्छेद 32 — मौलिक अधिकारों की सुरक्षा
सुप्रीम कोर्ट द्वारा मौलिक अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
अनुच्छेद 33 — विशेष शक्तियाँ
राष्ट्रपति और संसद कुछ विशेष अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं।
अनुच्छेद 34 — आपातकालीन अधिकार
देश की सुरक्षा के लिए आपातकालीन शक्तियाँ दी गई हैं।
अनुच्छेद 35 — कानून बनाने की शक्ति
केंद्र और राज्य सरकार संविधान के अनुसार कानून बना सकते हैं।
अनुच्छेद 36 — राष्ट्रपति और राज्यपाल का कार्य
राष्ट्रपति और राज्यपाल संविधान के अनुसार अपने अधिकारों का प्रयोग करेंगे।
अनुच्छेद 37 — directive principles of state policy
राज्य नीति निर्देशक सिद्धांत नागरिकों के कल्याण के लिए लागू होंगे।
अनुच्छेद 38 — समाज कल्याण
केंद्र और राज्य समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए नीति बनाएंगे।
अनुच्छेद 39 — समानता और न्याय
सभी नागरिकों के लिए न्याय, समानता और अवसर सुनिश्चित किया जाएगा।
अनुच्छेद 40 — ग्राम पंचायतों का गठन
राज्य अपने स्तर पर स्थानीय स्वशासन और ग्राम पंचायतों का गठन करेंगे।
अनुच्छेद 41 — सामाजिक सुरक्षा
राज्य रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में नागरिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगा।
अनुच्छेद 42 — श्रमिकों के लिए लाभ
श्रम कानूनों और लाभों के अनुसार काम करने वालों को सुविधाएँ दी जाएँगी।
अनुच्छेद 43 — कृषि और उद्यमी विकास
राज्य कृषक और उद्यमियों के विकास के लिए नीति बनाएगा।
अनुच्छेद 44 — एकीकृत न्याय व्यवस्था
राज्य न्याय व्यवस्था को सुधार और एकीकृत करने का प्रयास करेगा।
अनुच्छेद 45 — बाल शिक्षा का अधिकार
राज्य 6 वर्ष से 14 वर्ष तक बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करेगा।
अनुच्छेद 46 — अनुसूचित जाति और जनजातियों का कल्याण
राज्य अनुसूचित जाति और जनजातियों के सामाजिक और शैक्षिक कल्याण के लिए योजना बनाएगा।
अनुच्छेद 47 — स्वास्थ्य और पोषण
राज्य के लिए प्राथमिक कर्तव्य है कि वह स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति सुधारें।
अनुच्छेद 48 — पशु पालन और कृषि सुधार
राज्य पशु पालन और कृषि सुधार की नीति बनाएगा।
अनुच्छेद 49 — प्राकृतिक संपदा का संरक्षण
राज्य प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण सुनिश्चित करेगा।
अनुच्छेद 50 — न्यायपालिका की स्वतंत्रता
राज्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए उपाय करेगा।
भारत का संविधान (अनुच्छेद 51 से 100)
अनुच्छेद 51 — अंतर्राष्ट्रीय संबंध
भारत के लिए यह कर्तव्य है कि वह शांतिपूर्ण और मित्रवत अंतर्राष्ट्रीय संबंध बनाए रखे।
अनुच्छेद 52 — राष्ट्रपति का पद
भारत का राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख होगा।
अनुच्छेद 53 — राष्ट्रपति की शक्तियाँ
राष्ट्रपति के पास केंद्र और राज्य में संवैधानिक कार्यों और आदेश देने की शक्तियाँ हैं।
अनुच्छेद 54 — राष्ट्रपति का चुनाव
राष्ट्रपति का चुनाव सांसदों और विधानसभा सदस्यों द्वारा किया जाएगा।
अनुच्छेद 55 — चुनाव की पद्धति
राष्ट्रपति के चुनाव में मतों का गणना और नियम संविधान के अनुसार होंगे।
अनुच्छेद 56 — राष्ट्रपति का कार्यकाल
राष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा।
अनुच्छेद 57 — पुन: निर्वाचनीयता
राष्ट्रपति पुनः निर्वाचित हो सकता है।
अनुच्छेद 58 — राष्ट्रपति के योग्यताएँ
राष्ट्रपति बनने के लिए व्यक्ति भारतीय नागरिक होना चाहिए और अन्य शर्तें पूरी करनी होंगी।
अनुच्छेद 59 — राष्ट्रपति का अयोग्यता
राष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान कोई अयोग्यता जैसे अपराध आदि उसके पद को प्रभावित कर सकती है।
अनुच्छेद 60 — राष्ट्रपति की कसम
राष्ट्रपति पद ग्रहण करने से पहले संविधान के अनुसार शपथ लेगा।
अनुच्छेद 61 — राष्ट्रपति का अपवाद
राष्ट्रपति को कानून के अनुसार शिकायत या प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।
अनुच्छेद 62 — राष्ट्रपति का निर्वाचन और शपथ
निवाचन और शपथ संविधान के अनुसार संपन्न होंगे।
अनुच्छेद 63 — उपराष्ट्रपति
भारत का उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में कार्य करेगा।
अनुच्छेद 64 — उपराष्ट्रपति का कार्यकाल
उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा।
अनुच्छेद 65 — उपराष्ट्रपति की शक्तियाँ
उपराष्ट्रपति संसद के अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा और अन्य संवैधानिक कार्य करेगा।
अनुच्छेद 66 — उपराष्ट्रपति का निर्वाचित होना
उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद द्वारा किया जाएगा।
अनुच्छेद 67 — उपराष्ट्रपति की शपथ
उपराष्ट्रपति पद ग्रहण करने से पहले संविधान के अनुसार शपथ लेगा।
अनुच्छेद 68 — उपराष्ट्रपति की अयोग्यता
संवैधानिक या अन्य कानूनी नियमों के अनुसार उपराष्ट्रपति अयोग्य हो सकता है।
अनुच्छेद 69 — केंद्रीय मंत्रिमंडल
राष्ट्रपति के सलाहकार के रूप में प्रधानमंत्री और अन्य मंत्री कार्य करेंगे।
अनुच्छेद 70 — राष्ट्रपति की शक्ति
राष्ट्रपति केंद्र के कार्यों और निर्देशों के लिए जिम्मेदार होगा।
अनुच्छेद 71 — राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का विवाद
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के बीच किसी विवाद को न्यायालय सुलझाएगा।
अनुच्छेद 72 — राष्ट्रपति की माफी और क्षमा
राष्ट्रपति विशेष परिस्थितियों में माफी या क्षमा प्रदान कर सकता है।
अनुच्छेद 73 — केंद्र और राज्य की शक्तियाँ
केंद्र और राज्य के बीच संवैधानिक कार्य और शक्तियों का बंटवारा तय किया गया है।
अनुच्छेद 74 — मंत्रिपरिषद और राष्ट्रपति
राष्ट्रपति अपनी सलाह के लिए मंत्रिपरिषद का पालन करेगा।
अनुच्छेद 75 — प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद
प्रधानमंत्री और मंत्री राष्ट्रपति के सलाहकार होंगे और उनके प्रति जिम्मेदार होंगे।
अनुच्छेद 76 — कानून सलाहकार
राष्ट्रपति अपने सलाह के लिए मुख्य न्यायिक सलाहकार नियुक्त कर सकता है।
अनुच्छेद 77 — कार्य और प्रशासन
केंद्र सरकार के सभी कार्य और आदेश राष्ट्रपति के माध्यम से होंगे।
अनुच्छेद 78 — प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के सलाह के लिए जिम्मेदार होंगे।
अनुच्छेद 79 — संसद का गठन
संसद में राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा शामिल होंगे।
अनुच्छेद 80 — राज्यसभा का गठन
राज्यसभा के सदस्य राज्यों के प्रतिनिधि होंगे और संविधान के अनुसार चुने जाएंगे।
अनुच्छेद 81 — लोकसभा का गठन
लोकसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाएंगे।
अनुच्छेद 82 — संसद का कार्यकाल
संसद का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा, जब तक इसे समाप्त नहीं किया जाए।
अनुच्छेद 83 — लोकसभा का कार्यकाल
लोकसभा का कार्यकाल भी पांच वर्ष का होगा।
अनुच्छेद 84 — सदस्य की योग्यताएँ
संसद का सदस्य बनने के लिए आयु, नागरिकता और अन्य शर्तें पूरी करनी होंगी।
अनुच्छेद 85 — संसद का सत्र
संसद का सत्र कम से कम हर छह माह में आयोजित होगा।
अनुच्छेद 86 — राष्ट्रपति का भाषण
सत्र के आरंभ में राष्ट्रपति संसद को भाषण देंगे।
अनुच्छेद 87 — राष्ट्रपति का संबोधन
राष्ट्रपति संसद को किसी भी विषय पर संबोधन कर सकते हैं।
अनुच्छेद 88 — सदस्य का शपथ
संसद के सदस्य शपथ या प्रतिज्ञा लेंगे।
अनुच्छेद 89 — अधिवेशन का नियम
संसद का संचालन संविधान और नियमों के अनुसार होगा।
अनुच्छेद 90 — प्रधानमंत्री का भाषण
प्रधानमंत्री संसद में नीति और कार्यक्रम के बारे में बताएंगे।
अनुच्छेद 91 — विधायिका का संगठन
संसद में नियम और प्रक्रिया संविधान के अनुसार निर्धारित होंगे।
अनुच्छेद 92 — नियम और कार्यवाही
संसद अपने नियमों के अनुसार कार्यवाही करेगी।
अनुच्छेद 93 — लोकसभा और राज्यसभा का अध्यक्ष
लोकसभा का अध्यक्ष और राज्यसभा का सभापति अपने सदनों का संचालन करेंगे।
अनुच्छेद 94 — उपाध्यक्ष और उपसभापति
उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति होंगे, लोकसभा के उपाध्यक्ष निर्वाचित होंगे।
अनुच्छेद 95 — संसद की स्थायी समितियाँ
संसद स्थायी समितियाँ बना सकती है।
अनुच्छेद 96 — विधेयक प्रस्ताव
संसद विधेयक पेश कर सकती है।
अनुच्छेद 97 — राष्ट्रपति की स्वीकृति
विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद कानून बनेगा।
अनुच्छेद 98 — विधायिका का अधिकार
संसद केंद्र के लिए कानून बनाने का अधिकार रखेगी।
अनुच्छेद 99 — विधायिका की शक्तियाँ
संसद वित्तीय और अन्य मामलों में अपने अधिकारों का प्रयोग करेगी।
अनुच्छेद 100 — संसद की बैठकें
संसद की बैठकें संविधान और नियमों के अनुसार आयोजित होंगी।
भारत का संविधान (अनुच्छेद 101 से 150)
अनुच्छेद 101 — संसद सदस्य की अस्थायी स्थिति
सांसद का पद खाली होने या मृत्यु होने पर उसे भरा जाएगा।
अनुच्छेद 102 — सदस्यता का अयोग्य होना
किसी सदस्य को अपराध या अन्य कारणों से संसद सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
अनुच्छेद 103 — सांसदों का वेतन
सांसदों को वेतन और भत्ते संविधान के अनुसार दिए जाएंगे।
अनुच्छेद 104 — सांसदों के लाभ
सांसदों को चिकित्सा, पेंशन और अन्य सुविधाएँ दी जाएंगी।
अनुच्छेद 105 — सांसदों का अभिव्यक्ति अधिकार
सांसद संसद में बोलने और चर्चा करने के लिए स्वतंत्र होंगे, किसी मुकदमे की चिंता किए बिना।
अनुच्छेद 106 — वेतन और भत्तों का निर्धारण
संसद अपने वेतन और भत्तों को कानून के अनुसार तय करेगी।
अनुच्छेद 107 — विधायिका की बहुमत
संसद के निर्णय बहुमत से लिए जाएंगे।
अनुच्छेद 108 — संयुक्त समिति
दोनों सदनों के लिए संयुक्त समिति बनाई जा सकती है।
अनुच्छेद 109 — विधायिका की मत प्रक्रिया
संसद में प्रस्ताव और विधेयक मतदान के आधार पर पारित होंगे।
अनुच्छेद 110 — वित्तीय विधेयक
संपत्ति और कर संबंधी विधेयक संसद में विधि के अनुसार पारित होंगे।
अनुच्छेद 111 — राष्ट्रपति की स्वीकृति
संसद द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद कानून बनेगा।
अनुच्छेद 112 — वित्तीय वर्ष और बजट
संसद प्रत्येक वर्ष केंद्र का बजट और वित्तीय वर्ष तय करेगी।
अनुच्छेद 113 — वित्तीय प्रक्रिया
संसद वित्तीय विधेयक की प्रक्रिया निर्धारित करेगी।
अनुच्छेद 114 — वित्तीय अनुमोदन
संसद वित्तीय प्रस्ताव को अनुमोदित करेगी।
अनुच्छेद 115 — बजट और ऋण
केंद्र बजट और ऋण संबंधी कानून बनाएगा।
अनुच्छेद 116 — आपातकालीन वित्त
आपातकालीन स्थिति में संसद विशेष वित्तीय प्रावधान लागू कर सकती है।
अनुच्छेद 117 — वित्तीय प्रतिबंध
केंद्र या राज्य बिना संसद की स्वीकृति के वित्तीय व्यय नहीं कर सकते।
अनुच्छेद 118 — संसद के नियम
संसद अपने संचालन और नियमों का निर्धारण करेगी।
अनुच्छेद 119 — विधायिका के रिकॉर्ड
संसद के कार्य और निर्णय का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
अनुच्छेद 120 — सत्र और उपस्थित सदस्य
संसद के सत्र में उपस्थित सदस्यों की संख्या और संचालन के नियम निर्धारित होंगे।
अनुच्छेद 121 — संसदीय कार्यवाही पर न्यायिक नियंत्रण नहीं
संसद की कार्यवाही न्यायालय के नियंत्रण में नहीं होगी।
अनुच्छेद 122 — संसद की कार्यवाही की सुरक्षा
संसद के सदस्यों को उनकी अभिव्यक्ति और मतदान के लिए कानूनी सुरक्षा होगी।
अनुच्छेद 123 — राष्ट्रपति का ordinance
राष्ट्रपति विशेष परिस्थितियों में ordinance जारी कर सकते हैं।
अनुच्छेद 124 — सुप्रीम कोर्ट का गठन
सुप्रीम कोर्ट भारत का सर्वोच्च न्यायालय होगा।
अनुच्छेद 125 — न्यायाधीशों का वेतन
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों का वेतन और भत्ते निर्धारित होंगे।
अनुच्छेद 126 — न्यायाधीशों की नियुक्ति
राष्ट्रपति न्यायाधीशों की नियुक्ति करेंगे।
अनुच्छेद 127 — उच्च न्यायालय के अधीन कार्य
सुप्रीम कोर्ट उच्च न्यायालय के फैसलों की समीक्षा कर सकता है।
अनुच्छेद 128 — न्यायाधीशों की सलाह
राष्ट्रपति न्यायालय के मामलों में मुख्य न्यायाधीश की सलाह लेगा।
अनुच्छेद 129 — सुप्रीम कोर्ट का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट संविधान और कानून की व्याख्या करेगा।
अनुच्छेद 130 — न्यायालय का स्थान
सुप्रीम कोर्ट का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा।
अनुच्छेद 131 — मुकदमेबाजी अधिकार
सुप्रीम कोर्ट केंद्र और राज्यों के बीच विवाद निपटाएगा।
अनुच्छेद 132 — अपील का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट उच्च न्यायालय के निर्णयों की समीक्षा करेगा।
अनुच्छेद 133 — अपील की शर्तें
सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए संविधान और कानून द्वारा शर्तें तय की जाएंगी।
अनुच्छेद 134 — मृत्युदंड अपील
मृत्युदंड के मामलों में सुप्रीम कोर्ट अपील का अधिकार देगा।
अनुच्छेद 135 — न्यायिक सुरक्षा
सुप्रीम कोर्ट संविधान और कानून की रक्षा करेगा।
अनुच्छेद 136 — विशेष अनुमति अपील
सुप्रीम कोर्ट विशेष अनुमति के साथ अपील स्वीकार करेगा।
अनुच्छेद 137 — निर्णय का अंतिम प्रभाव
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होंगे।
अनुच्छेद 138 — अदालत का आदेश
सुप्रीम कोर्ट का आदेश सभी व्यक्तियों और संस्थाओं पर लागू होगा।
अनुच्छेद 139 — संविधान की व्याख्या
सुप्रीम कोर्ट संविधान की व्याख्या करेगा।
अनुच्छेद 140 — न्यायिक अधिकारिता
सुप्रीम कोर्ट न्यायिक अधिकारिता का विस्तार करेगा।
अनुच्छेद 141 — सर्वोच्च न्याय का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सभी न्यायालयों के लिए बाध्यकारी होगा।
अनुच्छेद 142 — आदेश का पालन
सुप्रीम कोर्ट संविधान और कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए आदेश जारी कर सकता है।
अनुच्छेद 143 — राष्ट्रपति से सलाह
राष्ट्रपति किसी प्रश्न पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह ले सकते हैं।
अनुच्छेद 144 — कानून का पालन
सभी न्यायालय संविधान और कानून का पालन करेंगे।
अनुच्छेद 145 — कोर्ट का नियम
सुप्रीम कोर्ट अपने नियम और प्रक्रिया का निर्धारण करेगा।
अनुच्छेद 146 — न्यायालय के कर्मचारी
सुप्रीम कोर्ट अपने कर्मचारियों को नियुक्त करेगा।
अनुच्छेद 147 — न्यायाधीश का स्थानांतरण
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित किया जा सकता है।
अनुच्छेद 148 — अटॉर्नी जनरल
भारत का अटॉर्नी जनरल केंद्र सरकार का मुख्य कानून सलाहकार होगा।
अनुच्छेद 149 — विशेष अदालतें
केंद्र और राज्य विशेष अदालतें या ट्रिब्यूनल बना सकते हैं।
अनुच्छेद 150 — उच्च न्यायालय और केंद्र
सुप्रीम कोर्ट के नियम केंद्र और राज्य में लागू होंगे।
भारत का संविधान (अनुच्छेद 151 से 200)
अनुच्छेद 151 — राज्यों की विधानसभाएँ
राज्यों में विधानसभा का गठन किया जाएगा और इसके सदस्य चुनाव के माध्यम से होंगे।
अनुच्छेद 152 — राज्यपाल की नियुक्ति
प्रत्येक राज्य के लिए राष्ट्रपति राज्यपाल नियुक्त करेंगे।
अनुच्छेद 153 — प्रत्येक राज्य के लिए राज्यपाल
केंद्र सरकार प्रत्येक राज्य में राज्यपाल का चुनाव करेगी।
अनुच्छेद 154 — राज्यपाल की शक्तियाँ
राज्यपाल राज्य सरकार और विधायिका के कार्यों में प्रमुख होंगे।
अनुच्छेद 155 — राज्यपाल की नियुक्ति का नियम
राष्ट्रपति राज्यपाल की नियुक्ति करेगा और नियम बनाएगा।
अनुच्छेद 156 — राज्यपाल का कार्यकाल
राज्यपाल पांच वर्ष के लिए नियुक्त होंगे।
अनुच्छेद 157 — राज्यपाल की योग्यताएँ
राज्यपाल भारतीय नागरिक होना चाहिए और अन्य संविधान द्वारा निर्धारित शर्तें पूरी करनी होंगी।
अनुच्छेद 158 — राज्यपाल का कार्यालय
राज्यपाल अपने कार्यालय के माध्यम से राज्य के कार्य संपन्न करेंगे।
अनुच्छेद 159 — शपथ या प्रतिज्ञा
राज्यपाल पद ग्रहण करने से पहले संविधान के अनुसार शपथ लेंगे।
अनुच्छेद 160 — राज्यपाल की सलाह
राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करेंगे।
अनुच्छेद 161 — माफी और क्षमा
राज्यपाल कुछ मामलों में माफी और क्षमा प्रदान कर सकते हैं।
अनुच्छेद 162 — राज्य कार्य और शक्तियाँ
राज्य के कार्य संविधान और कानून के अनुसार होंगे।
अनुच्छेद 163 — राज्य मंत्री और सलाह
राज्य में मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद राज्यपाल के सलाहकार होंगे।
अनुच्छेद 164 — मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद
राज्य के मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद राज्यपाल के प्रति जिम्मेदार होंगे।
अनुच्छेद 165 — विधायिका का मुख्य सचिव
राज्य विधायिका का संचालन मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।
अनुच्छेद 166 — विधायिका के आदेश
राज्यपाल द्वारा विधायिका के आदेश और प्रस्ताव संविधान के अनुसार लागू होंगे।
अनुच्छेद 167 — राज्य नीति निदेशक
राज्य के नीति निर्देशक जनता और संविधान के हित में नीतियाँ बनाएंगे।
अनुच्छेद 168 — विधानसभा का गठन
सभी राज्यों में विधानसभा का गठन संविधान के अनुसार होगा।
अनुच्छेद 169 — विधानसभा का भंग
राज्यपाल विधानसभा को संविधान के अनुसार भंग कर सकते हैं।
अनुच्छेद 170 — सदस्य संख्या
राज्य विधानसभा में सदस्य संख्या और निर्वाचन का नियम संविधान द्वारा तय किया जाएगा।
अनुच्छेद 171 — राज्य सभा का प्रतिनिधित्व
राज्य से राज्यसभा के लिए सदस्य निर्वाचित होंगे।
अनुच्छेद 172 — विधानसभा का कार्यकाल
राज्य विधानसभा का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा।
अनुच्छेद 173 — विधायिका का अध्यक्ष
राज्य विधानसभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष निर्वाचित होंगे।
अनुच्छेद 174 — अधिवेशन और सत्र
राज्य विधानसभाओं का सत्र संविधान और नियमों के अनुसार आयोजित होगा।
अनुच्छेद 175 — बजट और वित्त
राज्य का बजट और वित्तीय योजना विधानसभा द्वारा अनुमोदित होगी।
अनुच्छेद 176 — विधानसभा का रिकॉर्ड
राज्य विधानसभा के निर्णय और कार्य का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
अनुच्छेद 177 — विधानसभा के नियम
राज्य विधानसभाएँ अपने संचालन और नियम तय करेंगी।
अनुच्छेद 178 — विधायिका की सुरक्षा
सदस्यों को उनके अभिव्यक्ति और मतदान के लिए कानूनी सुरक्षा होगी।
अनुच्छेद 179 — उच्च न्यायालय का गठन
राज्यों में उच्च न्यायालय का गठन और कार्य संविधान के अनुसार होगा।
अनुच्छेद 180 — न्यायालय का अधिकार
उच्च न्यायालय राज्य के कानून और विवादों की समीक्षा करेगा।
अनुच्छेद 181 — न्यायाधीशों की नियुक्ति
राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश की सलाह से होगी।
अनुच्छेद 182 — न्यायाधीशों का वेतन
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन और भत्ते निर्धारित होंगे।
अनुच्छेद 183 — न्यायिक अधिकारियों की स्वतंत्रता
न्यायाधीश स्वतंत्र होंगे और किसी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होंगे।
अनुच्छेद 184 — न्यायाधीश का अधिकार
उच्च न्यायालय राज्य के मामलों और कानून की समीक्षा करेगा।
अनुच्छेद 185 — न्यायालय का संचालन
उच्च न्यायालय अपने संचालन और नियम बनाएगा।
अनुच्छेद 186 — न्यायालय का रिकॉर्ड
उच्च न्यायालय के निर्णय और आदेश का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
अनुच्छेद 187 — न्यायालय के आदेश
उच्च न्यायालय के आदेश सभी राज्य संस्थाओं पर लागू होंगे।
अनुच्छेद 188 — न्यायिक सुरक्षा
न्यायाधीशों और अदालत के आदेश कानूनी रूप से सुरक्षित होंगे।
अनुच्छेद 189 — राज्य वित्त आयोग
राज्य वित्त आयोग राज्य के राजस्व और वितरण की समीक्षा करेगा।
अनुच्छेद 190 — विधानसभा का निर्णय
राज्य विधानसभा के निर्णय बहुमत से लिए जाएंगे।
अनुच्छेद 191 — सदस्य का अयोग्य होना
सदस्य अपराध या अन्य कारणों से अयोग्य घोषित किए जा सकते हैं।
अनुच्छेद 192 — सदस्य का रिकॉर्ड
सदस्यों का रिकॉर्ड और डेटा रखा जाएगा।
अनुच्छेद 193 — विधानसभा की सुरक्षा
सदस्यों को उनके अभिव्यक्ति और मतदान के लिए सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
अनुच्छेद 194 — राज्य सेवा आयोग
राज्य सेवा आयोग राज्य में सरकारी सेवाओं के लिए नियुक्तियाँ करेगा।
अनुच्छेद 195 — राज्य सरकार के कार्य
राज्य सरकार संविधान और कानून के अनुसार कार्य करेगी।
अनुच्छेद 196 — मुख्यमंत्री का कार्य
मुख्यमंत्री राज्य के शासन और नीति के लिए जिम्मेदार होगा।
अनुच्छेद 197 — मंत्रिपरिषद
राज्य के मंत्रिपरिषद मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कार्य करेगी।
अनुच्छेद 198 — न्यायालय की स्वतंत्रता
राज्य के न्यायालय स्वतंत्र और निष्पक्ष कार्य करेंगे।
अनुच्छेद 199 — उच्च न्यायालय का अधिकार
उच्च न्यायालय राज्य के मामलों और कानून की समीक्षा करेगा।
अनुच्छेद 200 — उच्च न्यायालय के आदेश
उच्च न्यायालय के आदेश सभी सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं पर लागू होंगे।
भारत का संविधान (अनुच्छेद 201 से 250)
अनुच्छेद 201 — केंद्रीय वित्त आयोग
केंद्र सरकार केंद्रीय वित्त आयोग का गठन करेगी, जो राज्य और केंद्र के वित्तीय मामलों की समीक्षा करेगा।
अनुच्छेद 202 — राज्य वित्त आयोग
राज्य सरकार राज्य वित्त आयोग का गठन करेगी, जो राज्य के राजस्व और वितरण की समीक्षा करेगा।
अनुच्छेद 203 — वित्तीय रिपोर्ट
केंद्र और राज्य को वित्तीय रिपोर्ट संसद और विधानसभा में प्रस्तुत करनी होगी।
अनुच्छेद 204 — बजट प्रस्तुति
केंद्र और राज्य का बजट विधानसभा और संसद में पेश किया जाएगा।
अनुच्छेद 205 — ऋण और वित्तीय नीति
केंद्र और राज्य ऋण और वित्तीय नीति का पालन करेंगे।
अनुच्छेद 206 — वित्तीय अनुशासन
राज्य और केंद्र वित्तीय अनुशासन और नियमों का पालन करेंगे।
अनुच्छेद 207 — बजट अनुमोदन
संसद और राज्य विधानसभा वित्तीय प्रस्तावों को अनुमोदित करेंगे।
अनुच्छेद 208 — विधानसभा का वित्तीय नियंत्रण
राज्य विधानसभा राज्य के वित्तीय मामलों का नियंत्रण रखेगी।
अनुच्छेद 209 — लेखा परीक्षा
केंद्र और राज्य के खातों की लेखा परीक्षा नियंत्रक और लेखा परीक्षक करेंगे।
अनुच्छेद 210 — राज्य लेखा परीक्षक
राज्य के वित्तीय लेखा परीक्षा के लिए नियंत्रक और लेखा परीक्षक नियुक्त होंगे।
अनुच्छेद 211 — केंद्रीय लेखा परीक्षक
केंद्र के वित्तीय मामलों की समीक्षा और लेखा परीक्षा केंद्रीय नियंत्रक और लेखा परीक्षक करेंगे।
अनुच्छेद 212 — सरकारी धन का नियंत्रण
केंद्र और राज्य अपने धन और वित्तीय संसाधनों पर नियंत्रण रखेंगे।
अनुच्छेद 213 — वित्तीय रिपोर्ट प्रस्तुत करना
राज्य वित्त आयोग और लेखा परीक्षक की रिपोर्ट विधानसभा में पेश की जाएगी।
अनुच्छेद 214 — न्यायालय का अधिकार
उच्च न्यायालय राज्य के कानून और वित्तीय मामलों की समीक्षा करेगा।
अनुच्छेद 215 — न्यायालय के आदेश
उच्च न्यायालय के आदेश सभी सरकारी संस्थाओं पर लागू होंगे।
अनुच्छेद 216 — राज्य सेवा आयोग
राज्य सेवा आयोग राज्य में सरकारी सेवाओं के लिए नियुक्तियाँ करेगा।
अनुच्छेद 217 — न्यायाधीश की नियुक्ति
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राष्ट्रपति की सलाह से नियुक्त किए जाएंगे।
अनुच्छेद 218 — न्यायाधीशों का वेतन
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन और भत्ते निर्धारित होंगे।
अनुच्छेद 219 — न्यायाधीश का स्थानांतरण
राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को अन्य न्यायालय में स्थानांतरित किया जा सकता है।
अनुच्छेद 220 — न्यायालय का रिकॉर्ड
उच्च न्यायालय अपने आदेश और निर्णय का रिकॉर्ड रखेगा।
अनुच्छेद 221 — न्यायिक सुरक्षा
न्यायाधीशों और अदालत के आदेश कानूनी रूप से सुरक्षित होंगे।
अनुच्छेद 222 — राज्यों की सीमाएँ
राज्यों की सीमाएँ और परिसीमन संविधान के अनुसार तय होंगे।
अनुच्छेद 223 — राज्यों का संगठन
राज्य का प्रशासन और संगठन संविधान और कानून के अनुसार होगा।
अनुच्छेद 224 — आपातकालीन वित्त
आपातकालीन स्थिति में राज्य और केंद्र वित्तीय प्रावधान लागू करेंगे।
अनुच्छेद 225 — बजट अनुमोदन
संसद और राज्य विधानसभा वित्तीय बजट अनुमोदित करेगी।
अनुच्छेद 226 — न्यायालय का आदेश
उच्च न्यायालय संविधान और कानून का पालन सुनिश्चित करेगा।
अनुच्छेद 227 — जिला और सत्र न्यायालय
राज्यों में जिला और सत्र न्यायालय बनाए जाएंगे।
अनुच्छेद 228 — न्यायालय के अधिकार
उच्च न्यायालय जिला और सत्र न्यायालय के फैसलों की समीक्षा करेगा।
अनुच्छेद 229 — न्यायालय के आदेश
जिला और सत्र न्यायालय के आदेश राज्य में लागू होंगे।
अनुच्छेद 230 — न्यायालय का संचालन
सभी न्यायालय अपने संचालन और नियम बनाएंगे।
अनुच्छेद 231 — न्यायालय के रिकॉर्ड
जिला और सत्र न्यायालय अपने आदेश और निर्णय का रिकॉर्ड रखेंगे।
अनुच्छेद 232 — न्यायिक सुरक्षा
न्यायाधीशों और अदालत के आदेश कानूनी रूप से सुरक्षित होंगे।
अनुच्छेद 233 — जिला न्यायाधीश की नियुक्ति
जिला न्यायाधीश राज्य सरकार और उच्च न्यायालय की सलाह से नियुक्त होंगे।
अनुच्छेद 234 — अधीनस्थ न्यायाधीश
उच्च न्यायालय अधीनस्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति और नियंत्रण करेगा।
अनुच्छेद 235 — न्यायालय का नियंत्रण
उच्च न्यायालय जिला और सत्र न्यायालय के प्रशासन का नियंत्रण करेगा।
अनुच्छेद 236 — न्यायालय की स्वतंत्रता
न्यायाधीश स्वतंत्र रूप से निर्णय करेंगे।
अनुच्छेद 237 — आपातकालीन न्यायालय
आपातकालीन स्थिति में केंद्र और राज्य न्यायालय बना सकते हैं।
अनुच्छेद 238 — न्यायिक पुनर्विनियोजन
राज्य और केंद्र न्यायाधीशों की पुनर्विनियोजन कर सकते हैं।
अनुच्छेद 239 — केंद्र शासित प्रदेश
केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासन राष्ट्रपति के माध्यम से होगा।
अनुच्छेद 240 — राष्ट्रपति के आदेश
केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रपति आदेश जारी करेंगे।
अनुच्छेद 241 — विशेष वित्तीय प्रावधान
केंद्र शासित प्रदेशों में वित्तीय प्रावधान लागू होंगे।
अनुच्छेद 242 — शासक का नियंत्रण
केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासन राष्ट्रपति के नियंत्रण में होगा।
अनुच्छेद 243 — पंचायती राज
राज्यों में पंचायत व्यवस्था संविधान के अनुसार लागू होगी।
अनुच्छेद 244 — क्षेत्रीय शासन
राज्यों में क्षेत्रीय शासन और प्रशासन निर्धारित होंगे।
अनुच्छेद 245 — केंद्र और राज्य का कानून
केंद्र और राज्य अपने-अपने क्षेत्र में कानून बनाएंगे।
अनुच्छेद 246 — विधायिका के अधिकार
केंद्र और राज्य के पास अपने-अपने क्षेत्र में विधायिका का अधिकार होगा।
अनुच्छेद 247 — विशेष शक्ति
राष्ट्रपति कुछ मामलों में विशेष शक्ति का प्रयोग कर सकते हैं।
अनुच्छेद 248 — सूची का नियंत्रण
केंद्र और राज्य सूची के अनुसार कानून बनाएंगे।
अनुच्छेद 249 — संसद का विशेष अधिकार
विशेष परिस्थितियों में संसद राज्य के लिए कानून बना सकती है।
अनुच्छेद 250 — राज्य की सुरक्षा और नियंत्रण
केंद्र आवश्यक होने पर राज्य के कार्यों और कानून पर नियंत्रण रखेगा।
भारत का संविधान (अनुच्छेद 251 से 300)
अनुच्छेद 251 — कानून का अनुपालन
केंद्र और राज्य के कानूनों का पालन सभी संस्थाओं और व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा।
अनुच्छेद 252 — दो या अधिक राज्यों के लिए कानून
दो या दो से अधिक राज्य संसद से अनुमति लेकर संयुक्त कानून बना सकते हैं।
अनुच्छेद 253 — अंतर्राष्ट्रीय संधियों का कानून
राष्ट्रपति अंतर्राष्ट्रीय संधियों के लिए आवश्यक कानून संसद से बना सकते हैं।
अनुच्छेद 254 — संघ और राज्य का कानून
किसी क्षेत्र में संघ और राज्य के कानून में टकराव होने पर संघ का कानून प्रमुख होगा।
अनुच्छेद 255 — राज्य कानून के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति
किसी राज्य में संसद द्वारा बनाए गए कानून के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक हो सकती है।
अनुच्छेद 256 — कार्यपालिका का नियंत्रण
राज्य सरकार संविधान और संघ सरकार के निर्देशों का पालन करेगी।
अनुच्छेद 257 — राज्य की सहायता
केंद्र राज्य को प्रशासन और विकास में सहायता देगा।
अनुच्छेद 258 — विशेष सहयोग
केंद्र और राज्य विशेष मामलों में सहयोग कर सकते हैं।
अनुच्छेद 259 — विशेष प्रावधान
कुछ राज्यों के लिए संविधान विशेष प्रावधान कर सकता है।
अनुच्छेद 260 — केंद्रीय वित्त और खाता
केंद्र का वित्त और खाता नियंत्रक और लेखा परीक्षक के नियंत्रण में होगा।
अनुच्छेद 261 — सार्वजनिक कार्यों की सुरक्षा
केंद्र और राज्य सार्वजनिक संपत्ति और कार्य की सुरक्षा करेंगे।
अनुच्छेद 262 — जल विवाद निपटान
राज्यों के बीच नदी और जल विवादों के निपटान के लिए संसद कानून बना सकती है।
अनुच्छेद 263 — परिषद का गठन
केंद्र राज्य परिषद बना सकता है, जो राज्यों के बीच समन्वय करेगा।
अनुच्छेद 264 — अदालत का अधिकार
जल विवाद और अन्य मामलों में संसद कानून द्वारा उच्च न्यायालय का अधिकार तय करेगी।
अनुच्छेद 265 — कराधान और कर का न्याय
कोई कर केवल कानून द्वारा लिया जाएगा।
अनुच्छेद 266 — संघ और राज्य की खाता
केंद्र और राज्य अपने खाता और वित्तीय लेखा रखेंगे।
अनुच्छेद 267 — राजकोष और व्यय
केंद्र और राज्य के राजकोष में धन जमा होगा और व्यय संविधान अनुसार होगा।
अनुच्छेद 268 — शुल्क और कर
केंद्र और राज्य कुछ विशेष शुल्क और कर वसूल कर सकते हैं।
अनुच्छेद 269 — सीमा शुल्क और व्यापार कर
केंद्र कुछ सीमा शुल्क और व्यापार कर लगा सकता है।
अनुच्छेद 270 — कर वितरण
केंद्र और राज्य के करों का वितरण वित्त आयोग द्वारा तय होगा।
अनुच्छेद 271 — कर का प्रबंधन
केंद्र और राज्य करों का प्रबंधन संविधान और कानून अनुसार करेंगे।
अनुच्छेद 272 — राजस्व रिपोर्ट
केंद्र और राज्य अपनी राजस्व रिपोर्ट संसद और विधानसभा में पेश करेंगे।
अनुच्छेद 273 — विशेष वित्तीय सहायता
केंद्र राज्यों को विशेष वित्तीय सहायता प्रदान कर सकता है।
अनुच्छेद 274 — वित्त आयोग की सिफारिश
केंद्र वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्यों को वित्तीय सहायता देगा।
अनुच्छेद 275 — योजना के लिए सहायता
केंद्र राज्य की योजनाओं और विकास के लिए सहायता करेगा।
अनुच्छेद 276 — कराधान का सीमा
केंद्र और राज्य कराधान की सीमा संविधान अनुसार तय होगी।
अनुच्छेद 277 — कराधान की प्रक्रिया
केंद्र और राज्य करों की प्रक्रिया संविधान अनुसार करेंगे।
अनुच्छेद 278 — कर संग्रहण
केंद्र और राज्य करों का संग्रहण नियंत्रक और लेखा परीक्षक की देखरेख में होगा।
अनुच्छेद 279 — विशेष कर प्रावधान
केंद्र विशेष परिस्थिति में कर प्रावधान लागू कर सकता है।
अनुच्छेद 280 — वित्त आयोग
वित्त आयोग केंद्रीय और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय संबंधों की समीक्षा करेगा और सिफारिश करेगा।
अनुच्छेद 281 — रिपोर्ट प्रस्तुत करना
वित्त आयोग अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करेगा।
अनुच्छेद 282 — अतिरिक्त सहायता
केंद्र राज्यों और संस्थाओं को अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान कर सकता है।
अनुच्छेद 283 — सीमा शुल्क रिपोर्ट
केंद्र सीमा शुल्क और करों की रिपोर्ट संसद में पेश करेगा।
अनुच्छेद 284 — कर वसूली
केंद्र और राज्य करों का वसूली संविधान और कानून अनुसार करेंगे।
अनुच्छेद 285 — सरकारी संपत्ति
केंद्र और राज्य की संपत्ति कर मुक्त होगी।
अनुच्छेद 286 — व्यापार और कर
केंद्र और राज्य व्यापार और करों का प्रबंधन संविधान अनुसार करेंगे।
अनुच्छेद 287 — रक्षा शुल्क
केंद्र रक्षा संबंधी शुल्क वसूल कर सकता है।
अनुच्छेद 288 — करों की अदायगी
केंद्र और राज्य करों का भुगतान और अदायगी कानून के अनुसार होगी।
अनुच्छेद 289 — केंद्रीय और राज्य अधिकारी
केंद्र और राज्य अपने अधिकारी नियुक्त करेंगे और वे कानून अनुसार कार्य करेंगे।
अनुच्छेद 290 — करों का वितरण
केंद्र और राज्य के करों का वितरण वित्त आयोग और संसद/विधानसभा के अनुसार होगा।
अनुच्छेद 291 — करों की वापसी
केंद्र और राज्य कानून के अनुसार करों की वापसी करेंगे।
अनुच्छेद 292 — कर्ज लेना
केंद्र और राज्य कर्ज और ऋण कानून अनुसार ले सकते हैं।
अनुच्छेद 293 — कर्ज की शर्तें
केंद्र और राज्य ऋण और कर्ज की शर्तें संविधान और कानून अनुसार पालन करेंगे।
अनुच्छेद 294 — कर्ज और ब्याज
केंद्र और राज्य द्वारा लिए गए कर्ज पर ब्याज और भुगतान नियम संविधान अनुसार होंगे।
अनुच्छेद 295 — कर संग्रहण का रिकॉर्ड
केंद्र और राज्य कर संग्रहण और खाता का रिकॉर्ड रखेंगे।
अनुच्छेद 296 — विशेष वित्तीय नियम
केंद्र और राज्य विशेष परिस्थिति में वित्तीय नियम लागू कर सकते हैं।
अनुच्छेद 297 — समुद्री क्षेत्र और कर
केंद्र समुद्री क्षेत्र और सागर में कर और शुल्क लगा सकता है।
अनुच्छेद 298 — संघीय संपत्ति
केंद्र की संपत्ति संघीय नियंत्रण में होगी।
अनुच्छेद 299 — सरकारी अनुबंध
केंद्र और राज्य के अनुबंध राष्ट्रपति या राज्यपाल के नाम से होंगे।
अनुच्छेद 300 — सरकारी दायित्व
केंद्र और राज्य अपने दायित्व और देनदारियों के लिए जिम्मेदार होंगे।
भारत का संविधान (अनुच्छेद 301 से 350)
अनुच्छेद 301 — व्यापार और व्यवसाय की स्वतंत्रता
भारत में राज्य और केंद्र के बीच व्यापार, व्यवसाय और वाणिज्य की स्वतंत्रता होगी।
अनुच्छेद 302 — संसद का विशेष अधिकार
संसद कुछ मामलों में व्यापार और व्यवसाय पर कानून बना सकती है।
अनुच्छेद 303 — व्यापार और कर का नियंत्रण
केंद्र और राज्य व्यापार और करों का नियंत्रण करेंगे।
अनुच्छेद 304 — व्यापार में प्रतिबंध
केंद्र और राज्य सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और नैतिकता के लिए व्यापार पर प्रतिबंध लगा सकते हैं।
अनुच्छेद 305 — विशेष प्रावधान
केंद्र विशेष परिस्थितियों में व्यापार और करों का प्रावधान कर सकता है।
अनुच्छेद 306 — राज्य कराधान
राज्य व्यापार और करों का प्रबंधन संविधान और कानून अनुसार करेगा।
अनुच्छेद 307 — संघीय सेवा आयोग
केंद्र संघीय सेवाओं के लिए आयोग बनाएगा।
अनुच्छेद 308 — राज्य सेवा आयोग
राज्य सेवा आयोग राज्य की सरकारी सेवाओं के लिए नियुक्तियाँ करेगा।
अनुच्छेद 309 — सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति
केंद्र और राज्य अपने कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा नियम बनाएंगे।
अनुच्छेद 310 — सेवा का सुरक्षा
कर्मचारियों को उनके सेवा में कानूनी सुरक्षा और अधिकार मिलेगा।
अनुच्छेद 311 — कर्मचारी के अधिकार
कर्मचारी को निष्कासन और सेवा में अनुचित कार्रवाई से बचाने के लिए कानूनी प्रक्रिया होगी।
अनुच्छेद 312 — संसद का विशेष अधिकार
संसद कुछ सेवाओं और कर्मचारियों के लिए विशेष नियम बना सकती है।
अनुच्छेद 313 — संवैधानिक सेवाएँ
कुछ संवैधानिक सेवाएँ केंद्र और राज्य में गठित की जा सकती हैं।
अनुच्छेद 314 — न्यायाधीश की नियुक्ति
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राष्ट्रपति की सलाह से नियुक्त होंगे।
अनुच्छेद 315 — उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय
राज्यों में उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय बनाए जाएंगे।
अनुच्छेद 316 — न्यायाधीश की सेवा
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवा और कार्यकाल निर्धारित किया जाएगा।
अनुच्छेद 317 — न्यायाधीश का निष्कासन
न्यायाधीश संविधान और कानून के अनुसार ही निष्कासित किए जा सकते हैं।
अनुच्छेद 318 — न्यायाधीश का वेतन और भत्ता
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन और भत्ते संविधान अनुसार होंगे।
अनुच्छेद 319 — न्यायालय में विशेष प्रावधान
केंद्र और राज्य उच्च न्यायालय में विशेष प्रावधान कर सकते हैं।
अनुच्छेद 320 — कर्मचारी और सेवा आयोग
केंद्र और राज्य अपने कर्मचारी और सेवा आयोग के नियम बनाएंगे।
अनुच्छेद 321 — विशेष अधिकार
केंद्र और राज्य कुछ मामलों में विशेष अधिकार का प्रयोग कर सकते हैं।
अनुच्छेद 322 — सेवा आयोग का संचालन
केंद्र और राज्य सेवा आयोग अपने नियम और संचालन तय करेंगे।
अनुच्छेद 323 — न्यायपालिका का प्रशासन
उच्च न्यायालय अपने प्रशासन और न्यायिक संचालन में स्वतंत्र होगा।
अनुच्छेद 324 — चुनाव आयोग
भारत में चुनाव आयोग का गठन होगा जो सभी चुनावों का स्वतंत्र संचालन करेगा।
अनुच्छेद 325 — मतदाता का नामांकन
सभी योग्य नागरिक चुनाव में मतदाता सूची में शामिल होंगे।
अनुच्छेद 326 — समान मतदान अधिकार
सभी नागरिकों को मतदान का समान अधिकार होगा।
अनुच्छेद 327 — चुनाव कानून
संसद और राज्यों को चुनाव कानून बनाने का अधिकार होगा।
अनुच्छेद 328 — चुनाव आयोग का सहयोग
राज्य और केंद्र चुनाव आयोग को सहयोग देंगे।
अनुच्छेद 329 — चुनाव पर निर्णय
सभी चुनाव आयोग के आदेश और निर्णय संविधान अनुसार मान्य होंगे।
अनुच्छेद 330 — आरक्षित सीटें (संसद)
संसद में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें होंगी।
अनुच्छेद 331 — राज्य के लिए आरक्षित सीटें
राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए सीटें आरक्षित होंगी।
अनुच्छेद 332 — विधानसभा में आरक्षण
राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण होगा।
अनुच्छेद 333 — उपाध्यक्ष की नियुक्ति
राज्य में उपाध्यक्ष की नियुक्ति संविधान अनुसार होगी।
अनुच्छेद 334 — आरक्षण की अवधि
आरक्षण और विशेष प्रावधान संविधान द्वारा तय अवधि तक लागू होंगे।
अनुच्छेद 335 — सेवा में उचित अवसर
अनुसूचित जाति और जनजाति को सरकारी सेवाओं में उचित अवसर मिलेगा।
अनुच्छेद 336 — कर्मचारी के विशेष अधिकार
अनुसूचित जाति और जनजाति के सरकारी कर्मचारियों के लिए विशेष नियम बन सकते हैं।
अनुच्छेद 337 — सरकारी शिक्षा
अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों को शिक्षा के लिए विशेष सहायता दी जाएगी।
अनुच्छेद 338 — राष्ट्रीय आयोग
अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए राष्ट्रीय आयोग का गठन होगा।
अनुच्छेद 339 — केंद्रीय प्रावधान
केंद्र अनुसूचित जाति और जनजाति के कल्याण के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है।
अनुच्छेद 340 — अनुसूचित जाति और जनजाति के कल्याण
केंद्र अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए रिपोर्ट और सिफारिश बनाएगा।
अनुच्छेद 341 — अनुसूचित जाति की सूची
राष्ट्रपति अनुसूचित जाति की सूची बनाएंगे।
अनुच्छेद 342 — अनुसूचित जनजाति की सूची
राष्ट्रपति अनुसूचित जनजाति की सूची बनाएंगे।
अनुच्छेद 343 — भारत की भाषा
संविधान में भारत की आधिकारिक भाषा हिन्दी होगी।
अनुच्छेद 344 — भाषा आयोग
केंद्र भाषा आयोग बनाएगा जो भाषा संबंधी सिफारिश करेगा।
अनुच्छेद 345 — राज्य की भाषा
राज्य अपनी विधायिका में कोई भी आधिकारिक भाषा तय कर सकते हैं।
अनुच्छेद 346 — भाषा के प्रयोग
केंद्र और राज्य कार्यवाही और विधायिका में भाषा का प्रयोग संविधान अनुसार होगा।
अनुच्छेद 347 — विशेष अधिकार
केंद्र या राज्य भाषा के लिए विशेष अधिकार प्रदान कर सकते हैं।
अनुच्छेद 348 — न्यायालय में भाषा
उच्च न्यायालय और अन्य न्यायालयों में भाषा का प्रयोग संविधान अनुसार होगा।
अनुच्छेद 349 — राष्ट्रपति का आदेश
राष्ट्रपति कुछ मामलों में भाषा के आदेश जारी कर सकते हैं।
अनुच्छेद 350 — भाषाई अल्पसंख्यक अधिकार
भाषाई अल्पसंख्यकों को शिक्षा और सरकारी कार्यों में अपनी भाषा का प्रयोग करने का अधिकार होगा।
भारत का संविधान (अनुच्छेद 351 से 400)
अनुच्छेद 351 — भाषा का प्रचार
केंद्र भारत में हिन्दी भाषा के प्रचार और विकास को बढ़ावा देगा।
अनुच्छेद 352 — आपातकाल (राष्ट्रपति के अधिकार)
राष्ट्रीय सुरक्षा और आपातकाल की स्थिति में राष्ट्रपति विशेष अधिकार का प्रयोग कर सकते हैं।
अनुच्छेद 353 — आपातकाल के प्रभाव
राष्ट्रपति के द्वारा घोषित आपातकाल के दौरान संसद और राज्यों के अधिकार सीमित होंगे।
अनुच्छेद 354 — वित्तीय नियंत्रण
आपातकाल की स्थिति में केंद्र राज्यों के वित्तीय संसाधनों पर नियंत्रण कर सकता है।
अनुच्छेद 355 — राज्य की सुरक्षा
केंद्र राज्य की सुरक्षा और संविधान के पालन के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
अनुच्छेद 356 — राष्ट्रपति का शासन (राज्य में)
राज्य में सरकार संविधान के अनुसार कार्य न करे तो राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है।
अनुच्छेद 357 — राष्ट्रपति शासन के दौरान विधायिका
राष्ट्रपति शासन के दौरान संसद और राष्ट्रपति राज्य के लिए कानून बना सकते हैं।
अनुच्छेद 358 — मौलिक अधिकार का प्रभाव
आपातकाल में कुछ मौलिक अधिकार अस्थायी रूप से सीमित किए जा सकते हैं।
अनुच्छेद 359 — अधिकारों का निलंबन
राष्ट्रपति आपातकाल के दौरान किसी विशेष अधिकारों को निलंबित कर सकते हैं।
अनुच्छेद 360 — वित्तीय आपातकाल
केंद्र वित्तीय आपातकाल की स्थिति में राज्य के वित्त पर नियंत्रण कर सकता है।
अनुच्छेद 361 — राष्ट्रपति और राज्यपाल की सुरक्षा
राष्ट्रपति और राज्यपाल संविधान और कानून के अनुसार सुरक्षा में होंगे।
अनुच्छेद 362 — वित्तीय दायित्व
केंद्र और राज्य अपने वित्तीय दायित्व और ऋण का भुगतान करेंगे।
अनुच्छेद 363 — आपातकालीन वित्तीय प्रावधान
आपातकाल में केंद्र राज्यों को वित्तीय सहायता और नियंत्रण दे सकता है।
अनुच्छेद 364 — राष्ट्रीय आपातकाल की समीक्षा
संसद राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति और उपायों की समीक्षा करेगी।
अनुच्छेद 365 — राज्यपाल के निर्देश
राज्यपाल राष्ट्रपति और केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करेंगे।
अनुच्छेद 366 — परिभाषाएँ
संविधान में प्रयुक्त शब्दों और परिभाषाओं का विवरण दिया गया है।
अनुच्छेद 367 — व्याख्या
अनुच्छेदों और कानूनों की व्याख्या संविधान अनुसार की जाएगी।
अनुच्छेद 368 — संविधान संशोधन
संविधान में संशोधन संसद के द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से किया जाएगा।
अनुच्छेद 369 — (आरक्षित)
इस अनुच्छेद का विशेष प्रावधान समय-समय पर लागू किया जा सकता है।
अनुच्छेद 370 — विशेष दर्जा (जम्मू-कश्मीर)
पूर्व में जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा मिला था। (ध्यान दें: अब यह रद्द हो चुका है)
अनुच्छेद 371 — विशेष प्रावधान (राज्यों के लिए)
कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान जैसे प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था लागू हो सकते हैं।
अनुच्छेद 372 — संवैधानिक अनुदान
स्वतंत्रता के समय केंद्र और राज्य को संवैधानिक अनुदान दिया गया।
अनुच्छेद 373 — संवैधानिक दायित्व
राज्यों को संविधान और कानून के अनुसार दायित्व और अधिकार मिलेंगे।
अनुच्छेद 374 — विशेष प्रावधान
कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान जैसे कानून और प्रशासन लागू होंगे।
अनुच्छेद 375 — आपराधिक न्याय
केंद्र और राज्य आपराधिक मामलों में न्याय सुनिश्चित करेंगे।
अनुच्छेद 376 — दंड और अपराध
केंद्र और राज्य अपराध और दंड का कानून बनाएंगे और लागू करेंगे।
अनुच्छेद 377 — आपराधिक संहिता
आपराधिक मामलों के लिए केंद्र आपराधिक संहिता बनाएगा।
अनुच्छेद 378 — न्यायिक पुनर्विनियोजन
केंद्र और राज्य न्यायिक पुनर्विनियोजन कर सकते हैं।
अनुच्छेद 379 — संघीय संपत्ति
केंद्र की संपत्ति संघीय नियंत्रण में होगी।
अनुच्छेद 380 — सरकार के अनुबंध
केंद्र और राज्य के अनुबंध राष्ट्रपति या राज्यपाल के नाम से होंगे।
अनुच्छेद 381 — सरकारी दायित्व
केंद्र और राज्य अपने दायित्व और देनदारियों के लिए जिम्मेदार होंगे।
अनुच्छेद 382 — (आरक्षित)
यह अनुच्छेद भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित है।
अनुच्छेद 383 — (आरक्षित)
यह अनुच्छेद भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित है।
अनुच्छेद 384 — संविधान की रक्षा
केंद्र और राज्य संविधान की रक्षा और पालन करेंगे।
अनुच्छेद 385 — (आरक्षित)
यह अनुच्छेद भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित है।
अनुच्छेद 386 — (आरक्षित)
यह अनुच्छेद भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित है।
अनुच्छेद 387 — संवैधानिक समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय संविधान और कानून का पालन सुनिश्चित करेंगे।
अनुच्छेद 388 — न्यायपालिका का संरक्षण
न्यायालय और न्यायाधीश संविधान और कानून के अनुसार स्वतंत्र रहेंगे।
अनुच्छेद 389 — विशेष प्रावधान
केंद्र और राज्य किसी विशेष परिस्थिति में विशेष प्रावधान लागू कर सकते हैं।
अनुच्छेद 390 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 391 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 392 — केंद्र और राज्य का तालमेल
केंद्र और राज्य अपने कार्यों में तालमेल बनाएंगे।
अनुच्छेद 393 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 394 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 395 — संविधान की अखंडता
केंद्र और राज्य संविधान की अखंडता बनाए रखेंगे।
अनुच्छेद 396 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 397 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 398 — न्यायिक समन्वय
सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय आपस में समन्वय बनाएंगे।
अनुच्छेद 399 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 400 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
भारत का संविधान (अनुच्छेद 401 से 448)
अनुच्छेद 401 — राज्य के विशेष प्रावधान
कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रशासन और नियम लागू होंगे।
अनुच्छेद 402 — कर्मचारी और सेवा आयोग
केंद्र और राज्य अपने कर्मचारी और सेवा आयोग के नियम बनाएंगे।
अनुच्छेद 403 — सेवा आयोग का संचालन
केंद्र और राज्य सेवा आयोग के संचालन और नियमों का पालन करेंगे।
अनुच्छेद 404 — सरकारी अनुबंध
केंद्र और राज्य अपने अनुबंध संविधान और कानून के अनुसार करेंगे।
अनुच्छेद 405 — सरकारी संपत्ति
केंद्र और राज्य की संपत्ति संविधान और कानून अनुसार सुरक्षित रहेगी।
अनुच्छेद 406 — कर और राजस्व
केंद्र और राज्य करों और राजस्व का प्रबंधन संविधान अनुसार करेंगे।
अनुच्छेद 407 — वित्त आयोग
वित्त आयोग केंद्रीय और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय संबंधों की समीक्षा करेगा।
अनुच्छेद 408 — रिपोर्ट प्रस्तुत करना
वित्त आयोग अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करेगा।
अनुच्छेद 409 — अतिरिक्त सहायता
केंद्र राज्यों और संस्थाओं को अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान कर सकता है।
अनुच्छेद 410 — कर्ज लेना
केंद्र और राज्य कर्ज और ऋण कानून अनुसार ले सकते हैं।
अनुच्छेद 411 — कर्ज की शर्तें
केंद्र और राज्य ऋण और कर्ज की शर्तें संविधान और कानून अनुसार पालन करेंगे।
अनुच्छेद 412 — कर्ज और ब्याज
केंद्र और राज्य द्वारा लिए गए कर्ज पर ब्याज और भुगतान नियम संविधान अनुसार होंगे।
अनुच्छेद 413 — कर संग्रहण का रिकॉर्ड
केंद्र और राज्य कर संग्रहण और खाता का रिकॉर्ड रखेंगे।
अनुच्छेद 414 — विशेष वित्तीय नियम
केंद्र और राज्य विशेष परिस्थिति में वित्तीय नियम लागू कर सकते हैं।
अनुच्छेद 415 — सरकारी अनुबंध
केंद्र और राज्य के अनुबंध राष्ट्रपति या राज्यपाल के नाम से होंगे।
अनुच्छेद 416 — सरकारी दायित्व
केंद्र और राज्य अपने दायित्व और देनदारियों के लिए जिम्मेदार होंगे।
अनुच्छेद 417 — संघीय संपत्ति
केंद्र की संपत्ति संघीय नियंत्रण में होगी।
अनुच्छेद 418 — सरकारी अनुबंध
केंद्र और राज्य के अनुबंध राष्ट्रपति या राज्यपाल के नाम से होंगे।
अनुच्छेद 419 — सरकारी दायित्व
केंद्र और राज्य अपने दायित्व और देनदारियों के लिए जिम्मेदार होंगे।
अनुच्छेद 420 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 421 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 422 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 423 — न्यायपालिका का संरक्षण
न्यायालय और न्यायाधीश संविधान और कानून के अनुसार स्वतंत्र रहेंगे।
अनुच्छेद 424 — न्यायिक समन्वय
सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय आपस में समन्वय बनाएंगे।
अनुच्छेद 425 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 426 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 427 — संविधान की अखंडता
केंद्र और राज्य संविधान की अखंडता बनाए रखेंगे।
अनुच्छेद 428 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 429 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 430 — राज्य के विशेष प्रावधान
कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रशासन और नियम लागू होंगे।
अनुच्छेद 431 — राज्य सेवा आयोग
राज्य सेवा आयोग राज्य की सरकारी सेवाओं के लिए नियुक्तियाँ करेगा।
अनुच्छेद 432 — कर्मचारी के अधिकार
कर्मचारियों को उनके सेवा में कानूनी सुरक्षा और अधिकार मिलेगा।
अनुच्छेद 433 — न्यायपालिका का प्रशासन
उच्च न्यायालय अपने प्रशासन और न्यायिक संचालन में स्वतंत्र होगा।
अनुच्छेद 434 — कर्मचारी सेवा नियम
केंद्र और राज्य अपने कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा नियम बनाएंगे।
अनुच्छेद 435 — संवैधानिक सेवाएँ
केंद्र और राज्य संवैधानिक सेवाओं के लिए नियम बनाएंगे।
अनुच्छेद 436 — उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय
राज्यों में उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय बनाए जाएंगे।
अनुच्छेद 437 — न्यायाधीश की सेवा
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवा और कार्यकाल निर्धारित किया जाएगा।
अनुच्छेद 438 — न्यायाधीश का निष्कासन
न्यायाधीश संविधान और कानून के अनुसार ही निष्कासित किए जा सकते हैं।
अनुच्छेद 439 — न्यायाधीश का वेतन
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन और भत्ते संविधान अनुसार होंगे।
अनुच्छेद 440 — विशेष प्रावधान
केंद्र और राज्य कुछ मामलों में विशेष प्रावधान लागू कर सकते हैं।
अनुच्छेद 441 — राज्य के प्रशासनिक अधिकार
केंद्र राज्यों के प्रशासनिक अधिकार और सहायता सुनिश्चित करेगा।
अनुच्छेद 442 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 443 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 444 — संविधान की रक्षा
केंद्र और राज्य संविधान की रक्षा और पालन करेंगे।
अनुच्छेद 445 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 446 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
अनुच्छेद 447 — संविधान संशोधन
संविधान में संशोधन संसद के द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से किया जाएगा।
अनुच्छेद 448 — (आरक्षित)
भविष्य में विशेष प्रावधानों के लिए आरक्षित।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें